शिलाजीत के फायदे

 #शिलाजीत-


शिलाजीत एक गाढ़ा भूरे रंग का, चिपचिपा पदार्थ है जो मुख्य रूप से हिमालय की चट्टानों से पाया जाता है। इसका रंग सफेद से लेकर गाढ़ा भूरा के बीच कुछ भी हो सकता है (अधिकांशतः गाढ़ा भूरा होता है।) शिलाजीत का उपयोग आमतौर पर आयुर्वेदिक चिकित्सा में किया जाता है। आयुर्वेद ने शिलाजीत की बहुत प्रशंसा की है जहाँ इसे बलपुष्टिकारक, ओजवर्द्धक, दौर्बल्यनाशक एवं धातु पौष्टिक अधिकांश नुस्खों में शिलाजीत के प्रयोग किये जाते है।


यह बहुत  प्रभावी और सुरक्षित है, जो आपके संपूर्ण स्वास्थ्य  पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। शिलाजीत कम टेस्टोस्टेरोन (Low testosterone), भूलने की बीमारी (अल्जाइमर), क्रोनिक थकान , आयरन की कमी से होने वाला रक्ताल्पता, पुरुष प्रजनन क्षमता में कमी  (पुरुष बांझपन /Male infertility), हृदय के लिए लाभदायक है ।


शुद्ध शिलाजीत के गुण-


शिलाजीत में स्नेह और लवण होने वातनाशक, सर गुण होने से पित्त नाशक, तीक्ष्ण गुण होने से कफ और मेदा नाशक, चरपरी और तीक्ष्ण गुण हेतु से दीपन, कड़वा रस होने से रक्तविकार नाशक, चरपरा, तीक्ष्ण, उष्ण गुण होने से कृमि नाशक होता है।

शिलाजीत स्निध होने से पौष्टिक, बल्य, आयुवर्द्धक, वृष्य, विष नाशक, रसायन, सत्ववर्धक गुणों को प्राप्ति करवाती है। (र. त.स.)


शिलाजं कटु तिक्तोष्णं कटुपाकं रसायनम्।                                                                                   छेदि योगवहं हन्ति कफ मेदोश्म शर्कराः।                                                                                       मूत्रकृर्च्छ् क्षयं श्वासं वात अर्शांसि च पाण्डुताम्।।                                                                           अपस्मारं तथोन्मादं शोथ कुष्ठ उदरकृमीन्।

(भा. प्र. नि.श्लोक-80, 81, 82, )


शिलाजीत कटु तिक्त रस युक्त, उष्ण वीर्य, कटु पाकी, और रसायन है। यह मलों का छेदन करता है, योगवाही है, कफ, मेद, अश्मरी, शर्करा को नष्ट करता है। मूत्रकृच्छ, क्षय, श्वास, वातिक अर्श, पांडु रोग, अपस्मार, उन्माद, शोथ, कुष्ठ, उदर कृमि को भी दूर करता है।


महर्षि अत्रेय जी कहते हैं-


"न सो अस्ति रोगों भुविसाध्यरूप: शिलाह वयम् यन्न जयेत  प्रसह्य।"


अर्थात् संसार में  ऐसा एक भी रोग नहीं है,जो विधिपूर्वक शिलाजीत के सेवन से नष्ट न हो सके।


          ****शारदा आयुर्वेदिक क्लीनिक****

                       डॉ. दिवाकर पाण्डेय

                          (नाड़ी विशेषज्ञ)




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